जन्मपत्रिका देखने / जांचने की विधि :-
जन्मपत्रिका में किसी भाव की जाँच करते समय न केवल राशी को महत्व देना चाहिए बल्कि नवांश और अन्य समुचित वर्गों पर भी विचार करना चाहिए.
किसी भाव का विश्लेषण करने में निम्नालिखित तथ्यों पर सावधानी पूर्वक विचार करना चाहिए -
१. प्रश्न सम्बंधित भाव अधिपति के बल, दृष्टी, युति और स्थिति |
२. प्रश्न सम्बंधित भाव का बल |
३. प्रश्न सम्बंधित भाव, भावाधिपति और उस भाव में स्थित ग्रहों या उस भाव पर दृष्टी डालने वाले ग्रहों के "प्राकृतिक गुण" |
४. क्या कीसी विशेष भाव में बनने वाले योग से प्रश्न सम्बंधित प्रभाव में कोई परिवर्तन हुआ है ? |
५. प्रश्न सम्बंधित भाव के स्वामी ग्रह की उच्च / नीच / सम स्थिति का भी प्रश्न के उत्तर पर सामान रूप से महत्त्व हैं |
६. प्रश्न सम्बंधित भाव के स्वामी या उस विशेष भाव का स्वामी जिस भाव में हैं उसके स्वामी की नवांश में अनुकूल / प्रतिकूल स्थिति |
किसी भी प्रश्न के उत्तर तथा निष्कर्ष पर पहुचने से पूर्व उपरोक्त तथ्यों पर समुचित रूप से विचार कर लेना आवश्यक हैं |
|| ॐ तत् सत ||
जन्मपत्रिका के द्वादश भाव से "खर्च" का अनुमान लगाया जाता है |
घाटा, व्यय, दंड, कारावास, अस्पताल में भर्ती होना, बुरी आदतें, ध्यान, गुप्त शत्रु, जन्म स्थान से दूर निवास आदि का ज्ञान द्वादश भाव से प्राप्त होता है |
व्यक्ति की सोच से ही व्यक्तित्व का निर्माण होता है, इस व्यक्तित्व विकास में बाधक होती है हमारी (अच्छी / बुरी) आदते | यदि हम एक लाख रुपये कमाए पर हमें जुआ, शराब जैसी बुरी आदते हो तो वह पैसा हमारी बर्बादी का कारण बनता है |
जेल (कारावास) जाना, अस्पताल में भर्ती होना बड़ी बीमारी होना आदि बाते भी हमें द्वादश स्थान के द्वारा ज्ञात होती है |
गुप्त शत्रु तथा चुगलखोरी भी इसी स्थान से जानी जा सकती है |
द्वादश स्थान से दो मुख्य बाते जानी जाती है, विदेश गमन तथा ध्यान (योग मार्ग की उच्चतम अवस्था) |
|| ॐ तत् सत ||
एकादश स्थान को "सर्व सिद्धि प्राप्ति" स्थान कहते है |
ज्योतिष में जन्मपत्रिका के एकादाश स्थान (11th House) को सबसे उत्तम स्थान कहा है, इस स्थान के समाहित विषयो को देखे तो यह सत्य भी प्रतीत होगा आइये जाने कैसे,
सर्वप्रथम एकादश स्थान के विषय लाभ, आमदनी, प्राप्ति, ऐश्वर्य, प्रशंसा (कार्य की वाहवाही) आदी, जन्मपत्रिका में हरेक स्थान एक विशेष महत्व रखता है परन्तु एकादश स्थान इनमे भी विशेष है, इसका कारण है की एकादश स्थान से हमारे कर्मो द्वारा प्राप्त लाभ देखा जाता है |
हम हमारे जीवन में आनंदित अवश्य रहते है, पर याद तो कीजिये वो समय जब हमें पहली बार स्कूल में अच्छे नंबर से पास होने पर हेड मास्टर जी द्वारा बक्षिस मिला और हमारा नाम पूरी स्लुल में अनाउंस किया गया, याफिर हम जब नोकरी पर लगे और पहली पगार हाथ में आने का आनंद ये हमारे जीवन के सबसे जादा सुखद क्षण होते है |
प्रशंसा (गुण गान) सभी को अच्छी लगती है, पर यदि वो सच में मन से की जाये तो ! कोई उपरी दिखावा कर रहा हो तो हमे जरा भी अच्छा नहीं लगता क्योकि प्रशंसा हमें हमारे कर्तव्यों का पालन करने की और प्रवृत्त करती है |
|| ॐ तत् सत ||
ज्योतिष में दशम भाव को "कर्म स्थान" कहा जाता है |
जन्म पत्रिका का दशम भाव हमारे कर्म को दर्शाता है जिसे आजीविका के साधन के रूप में उपयोग में लाया जाता हो | दशम स्थान से व्यापर, नौकरी / नौकरी में उच्च स्थान, कार्य में अभिरुचि तथा उत्तम कार्य कौशल को दर्शाता है |
कई बार जब हम समझ नहीं पाते की किस दिशा में हमारा भाग्य साथ देगा अर्थात क्या कार्य करना उचित है, उस समय हम ज्योतिष के माध्यम से कार्य को सुनिश्चित कर सकते है |
यदि हम नौकरी कर रहे है तो हमें उच्च स्थान (Promotion) की प्राप्ति कब होगी, इस विषय में भी दशम स्थान तथा उससे सम्बंधित ग्रह हमें दिशा निर्देश कर सकते है |
आज के स्पर्धा के युग में हर कोई जहा जीवन में आगे बढ़ने की अंधी दौड़ में भाग रहा है, उसी में यदि सफलता प्राप्त करनी हो तो कौनसे क्षेत्र को आमदनी का माध्यम बनाया जाये यह जानने के लिए जन्मपत्रिका का "दशम स्थान" एक मुख्य स्थान है |
|| ॐ तत् सत ||

ज्योतिष में नवम स्थान को "भाग्य" स्थान कहा जाता है,
संस्कृत में एक उक्ति है "भाग्यम फलती सर्वत्र" अर्थात "यदि हमारा भाग्य साथ दे तो सब कुछ हो सकता है" (कठिन से कठिन कार्य भी), पर यदि हमारा भाग्य कमज़ोर है तो हमारी पूरी महेनत से भी मनचाहे परिणाम प्राप्त नहीं होते |
आइये भाग्य को और आसानी से समझते है, भाग्य याने हमारे पूर्व अर्जित अच्छे कर्म | यदि हमने कुछ अच्छा किया है, तो निश्चित रूप से परिणाम हमारे पक्ष में प्राप्त होंगे, इसके विपरीत हमसे जाने अनजाने कुछ गलत हो गया हो तो हमें भाग्य साथ नहीं देगा अर्थात "हमारे कर्म ही हमारे भाग्य को अच्छा या बुरा बनाते है" |
नवम स्थान से गुरु, पिता, पौत्र (पोता), वंश वृद्धि आदि देखा जाता है आइये समझे इन के तथ्यों को, सर्वप्रथम गुरु तथा पिता यदि हमने पूर्व जन्म में अच्छे कर्म किये है तब तो हमें इस जन्म में उत्तम मार्गदर्शक (गुरु) तथा पिता प्राप्त होते है एवं यह जीवन भी धन्य होता है |
नवम स्थान से वंश वृद्धि (पोता आदि) के सम्बन्ध में विचार किया जाता है क्योंकि यह भाव पंचम का पंचम अर्थात हमारे पुत्र भाव से पंचम है जो की उनकी संतानों को दर्शाता है |
धन्य है हमारे ऋषि मुनि एवं उनका दीर्घ अवलोकन जो हमारे लिए इतना गहरा तथा हर समय हमारे प्रश्नों के समाधान के लिए ज्योतिष तथा वास्तु के ज्ञान की धरोहर हमारे लिए निर्माण कर गए |
मेरे सभी गुरुवरो को मेरा दंडवत प्रणाम जिन्होंने मुझे इस ज्ञान से अवगत कराया तथा समय समय पर मार्गदर्शित करते है |
|| ॐ तत् सत ||
ज्योतिष में अष्टम स्थान को "चिरनिद्रा" (मृत्यु) का स्थान अथवा आयु भाव कहा जाता है |
मृत्यु यह अटल सत्य है जीवन का, जिसे अष्टम स्थान से देखा जाता है | अष्टम स्थान मानसिक चिंता, बदनामी आदि को भी दर्शाता है |
किसी भी कार्य को सुचारू रूप से करने के लिए हमारी मानसिक शांति आवश्यक है यदि हमारा दिमाग शांत है तथा विचारो में सतर्कता है तो हमारा हर कार्य ठीक तरह से होगा इसके विपरीत यदि हमारा दिमाग शांत नहीं है तो हम उग्र होकर खुद के पक्ष में उचित निर्णय नहीं ले पाएंगे |
अष्टम स्थान से जीवन साथी की संपत्ति का आकलन भी किया जा सकता है |
आकस्मिक प्राप्त होने वाली संपत्ति की जानकारी भी अष्टम स्थान से प्राप्त हो सकती है |
|| ॐ तत् सत ||
जन्मपत्रिका के सप्तम भाव को हमारे जीवन का अविभाज्य अंग माना जाता है, कारण है इस स्थान की विशेषता आइये जानते है "सप्तम" भाव को,
जीवन में खुशिया ही खुशिया है यदि हमारे साथ दुःख बाटने एवं सुख में समाधान मानने वाला या वाली कोई साथ है तो, जीसे हम जीवन साथी / संगिनी कहते है | सब कुछ होते हुए भी हम अधूरे है यदि जीवन साथी नहीं है तो |
सप्तम भाव की यही विशेषता है इस स्थान के अंतर्गत हमारे जीवनसाथी को देखा जाता है यह स्थान जितना शुभ उतना हमारा जीवन सुखी, समाधानी तथा संपन्न |
शादी से सम्बंधित सभी प्रश्नों का उत्तर सप्तम स्थान से मिल सकता है जैसे,
शादी कब होगी ?
जीवन साथी कैसा होगा ? आदी |
इस स्थान से "व्यवसाय" एवं "व्यवसयियो" के बारे में जाना जाता है जिसे हम कहते "साझेदारी" (Partnership), यदि यह स्थान स्वस्थ है (शुभ दृष्टी / शुभ योग / शुभ ग्रहों से) तो हमें व्यवसाय में साझेदारी करने से लाभ होगा या नहीं यह जानने में सप्तम स्थान महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है |
|| ॐ तत् सत ||